महात्मा बुद्ध और राजा

एक बार की बात हैं महात्मा गौतम बुद्ध अपने शिष्यों को उपदेश दे रहे थे की तभी उनके पास राजा आज़ाद शत्रु आये और कहने लगे की हे भगवन  जब में क्रूर था सभी लोग मुझसे डरते थे और कोई भी अनुचित कार्य करने से पहले सोचते थे की कही उनको में मृत्यु दण्ड न दे दू…

परन्तु जब से में आपका अनुयाई बना हूँ तबसे लोग मेरे सीधेपन का बहुत फायदा उठाने लगे हैं जिससे मेरी प्रजा को खतरा हैं और मेरे शाशन में बहुत परेशानियाँ आ रही हैं अब आप ही बताइये की में क्या करू?

राजा की ये बात सुनके महात्मा बुद्ध ने कहा एक बार एक साधु किसी गाँव से गुजर रहा था वहाँ एक पीपल का पेड़ था तो साधु ने सोचा क्यों न इस पेड़ के निचे कुछ वक़्त आराम कर लिया जाए  क्योकि वह साधु चलते चलते थक गया था वह उस पेड़ के ओर जा ही रहा था की कुछ लोग उन्हें वहाँ जाने से मन कर देते हैं और बोलते हैं की इस पेड़ नीचे एक बहुत ही घातक साँप रहता हैं जो किसी को भी काट लेता हैं और वह मर जाता हैं फिर साधु उन लोगो से केहते हैं की एक न एक दिन तो मुझे मरना ही हैं चाहे में आज मरू या कल मरू उससे इस संसार में कुछ नहीं होगा

आप लोग मेरी चिंता न करे और मुझे आज्ञा दे |

 

साधु और सॉँप

वह उस पेड़ के नीचे जाते हैं और अपना आशान बिछा कर वहाँ बैठ जाते हैं थोड़ी ही देर में वहाँ सॉंप आ जाता हैं और कहता हैं क्या तुम्हे डर नहीं लगता तुम्हे लोगो ने बताया नहीं की यहाँ जो भी आता हैं में उसे जीवित नहीं छोड़ता |

फिर साधु बड़े ही प्रेम से  कहता हैं की इसमें डर वाली क्या बात हैं तुम जो भी करते हो इसी लिए करते हो क्योकि तुम्हे इस बात का डर रहता हैं की कोई तुम्हे मार न दे इसीलिए तुम लोगो को काटते हो और मुझे मृत्यु से कोई डर  नहीं हैं न ही मुझे इस जीवन की लालसा हैं….

इस बात से सॉंप को बहुत आघात होता हैं क्योकि उसे इस जीवन में उसके जैसा निडर इंसान नहीं देखा और वह साधु से कहता हैं मेने जो किया अपनी जान बचने के लिए किया अगर में ऐसा नहीं करता तो लोग मुझे मर देते |

साधु ने फिर सॉँप से कहा अगर तुम इस मोह से मुक्त होना चाहते हो तो शान्त हो जाओ प्यार से भर जाओ इतना कहकर साधु वह से चला जाता हैं….

अब सॉंप मन ही मन तय करता हैं की आज से में सारे बुरे काम छोड़ दूँगा और लोगो के प्रति प्रेम भावना रखूँगा पर इसका साँप के ऊपर उल्टा प्रभाव पड़ता हैं जो लोग पहले उसे देख कर भाग जाते थे अब वे लोग सॉँप को झेड़ते और खरोच मरते इतना ही नहीं बिना वजह के उसकी पुँछ दबाते और उसको पत्थर से भी मरने लगे परन्तु सॉंप उनको कुछ नहीं करता था उसके शरीर पर घाव के निशान भी बन गए सॉंप बहुत ही परेशान और दुःखी रहने लगा |

कुछ दिनों बाद वही साधु उस पेड़ के नीचे आराम करने के लिए बैठता हैं और उस सॉंप  को देख कर बड़ा आश्चर्य चकित हो जाता हैं की पहले उसकी क्या स्तिथि थी अब क्या हो गई और वह चिंतित भी होता हैं साँप साधु से केहता हैं जब से आप ने मुझसे कहा की में शांत हो जाऊ और सबके प्रति प्रेम भावना रखु तबसे लोगो ने मेरे साथ बहुत गलत व्यहवार करना शुरू कर दिए जिससे मुझे जीवन जीने में बहुत कठिनाई हो रही हैं अब आप बताइये मुझे क्या करना चाहिए |

साधु फिर साँप से केहता  हैं तुम क्रूर स्वभाव के हो मेने तुम्हे ये नहीं कहा था की तुम अपना स्वभाव ही बदल दो तुम्हारा जो उद्देश्य हैं उसे अपने अन्दर रखो और बहार से तुम्हे क्रूर ही रहना होगा क्योकि अगर तुम ऐसा नहीं करते हो तो लोग तुम्हे ख़त्म कर देंगे तुम एक ज़हरीले जीव हो इसका लोगो में डर रहना चाहिए |

तब महात्मा बुद्ध राजा आजाद शत्रु से कहते हैं इस कहानी से आपको यही शिक्षा मिलती हैं की तुम्हे अपना स्वभाव नहीं बदलना चाहिए लोगो के अन्दर यह  डर आवश्य रहना चाहिए की अगर वो गलत कार्य करेंगे तो उन्हें उसकी सजा भी मिलेगी | परन्तु तुम्हे अंदर से सबके लिए प्रेम भावना रखना चाहिए…!!!

 

In English

Mahatma Buddha and the King

Once upon a time, Mahatma Gautam Buddha was preaching to his disciples that only then the king’s free enemy came to him and started saying that O God when I was cruel, everyone was afraid of me and before doing any wrong thing, they used to think that somewhere. Don’t give them the death penalty…

But since I have become your follower, people have started taking great advantage of my straightforwardness, which threatens my subjects and many problems are coming in my governance, now you tell me what to do?

On hearing this, Mahatma Buddha said that once a monk was passing through a village, there was a peepal tree, so the monk thought why not take rest under this tree for some time because that monk was tired of walking. Was going towards that tree that some people dissuade them from going there and say that there is a very deadly snake under this tree which bites anyone and he dies, then the sages ask those people. It is said that one day I have to die, whether I die today or tomorrow, nothing will happen in this world.

You guys don’t worry about me and give me orders.

 

monk and snake

He goes under that tree and lays his hope and sits there, in a short time a snake comes there and says do you not fear, people have not told you that whoever comes here, I do not leave him alive.

Then the sage says with great love that what is there to fear in this, whatever you do, you do it because you are afraid that no one will kill you, that’s why you bite people and I have no fear of death No, nor do I crave this life….

This thing hurts the snake a lot because he has not seen a fearless person like him in this life and he tells the sage that what I did to save my life if I did not do this then people would have killed me.

The monk again said to the snake, if you want to be free from this attachment, then calm down, be filled with love, after saying this, the monk leaves from it.

Now the snake decides in the mind that from today I will leave all the bad deeds and have love towards the people, but it has the opposite effect on the snake, those who used to run away after seeing it, now those people slap the snake and scratch it. Not only did he die without any reason, he pressed his tail and he started dying with stones too, but the snake did not do anything to him, the marks of wounds also formed on his body, the snake became very upset and sad.

After a few days, the same monk sits to rest under that tree and is surprised to see that snake, what was his condition before, what has happened now and he is also worried that the snake tells the monk since You told me that I should calm down and have love towards everyone, since then people started treating me very badly, due to which I am finding it very difficult to live my life, now you tell me what should I do.

The monk then says to the snake that you are of a cruel nature, I did not tell you that you should change your nature, keep your purpose in yourself, and from outside you will have to be cruel because if you do not do this then people will tell you You are a poisonous creature, people should be afraid of it.

Then Mahatma Buddha says to King Azad Enemy, the only lesson you get from this story is that you should not change your nature, there should be a fear in people that if they do wrong things, they will also get punished for it. But you must have a love for everyone from inside