Garib Insaan Aur Mahatma Budha

एक समय की बात हैं, एक बहुत ही गरीब इंसान जो अपना गुजर बसर बहुत ही मुश्किल से करता था वह अपनी पत्नी और 2 बच्चो के साथ एक छोटी सी कुटियाँ में  रहता था वह रोज सुबह निकल जाता और रात को देर से आता उसकी ज़िन्दगी बस इसी तरह गुजर रही थी अपने परिवार का सही से पालन पोषण न कर पाने की वजह से उसने फैसला किया की वह अपना घर छोड़ देगा |

एक दिन जब उसका परिवार गहरी नींद में सौ रहे थे तब वह घर से निकल गया और बिना मंजिल जाता रहा जब वह अपने घर से बहुत दूर आ गया तब उसने देखा की महात्मा बुद्ध अपने शिष्यो के साथ एक नदी किनारे बैठे हुए थे ये देख उसने सोचा की वह सन्यासी हो जायेगा और भगवान बुद्ध का शिष्य बनकर विचरण करेगा

यही सोंचकर वह उनके डेरे में गया और उनकी चरणों में नस्मस्तक हो गया और बोला भगवन मुझे अपना शिष्य बनाके अपने साथ रखले |

भगवान बुद्ध को उस पर दया आ गई और उसे अपना शिष्य बना लिया तथपष्चात वह वहाँ से दूसरी जगह जाने लगे चलते-चलते वह एक जंगल में पहुंचे जहाँ एक बड़े पेड़ के नीचे विश्राम करने के लिए रुक गए और गर्मियों का मौसम था महात्मा बुद्ध  को प्यास लगी तभी उन्होंने अपने नए शिष्य को कहा की यहाँ पास ही में एक सरोवर हैं तुम जाकर वहाँ से पानी ले आओ |

जब वह सरोवर के पास पहुँचा तो उसने देखा उसमे कई जंगली जानवर विचरण कर रहे हैं परन्तु जैसे ही वह पानी भरने गया तो वह सब वहाँ से भाग गए उसने देखा की  पानी बिलकुल भी साफ़ नहीं था जानवरो के उधम से पानी बिलकुल गन्दा हो गया था यह देख वह बिना पानी भरे ही वापस आ गया और भगवान बुद्ध से बोला सरोवर का पानी बहुत गन्दा था उसे तो पिया नहीं जा सकता |

महात्मा बुद्ध कुछ सोच में पड़ गए और अपने शिष्य से फिर से वहाँ  जाकर पानी लाने को कहा इस बार जब वह सरोवर के पास पंहुचा तो उसने देखा पानी तो बिल्कुल स्वच्छ और पीने योग्य हो गया था वह पानी लेकर भगवान बुद्ध के पास पहुँचा और उनसे पूछा जिस सरोवर का पानी अभी कुछ समय पस्चात गन्दा था वहाँ दुबारा जाने पर साफ  और पीने योग्य कैसे हो गया |

तब महात्मा बुद्ध ने कहा जब जानवर पानी में उधम मचा रहे थे तब उसका कीचड़ ऊपर आ गया था परन्तु कुछ देर शांत रहने पर वापस नीचे बैठ गया | और पानी फिर से साफ और पीने योग्य हो गया | ठीक इसी प्रकार हमारे मन की भी स्तिथि होती हैं जीवन की भाग-दौड़ और कठिनाइया हमारे मन में उथल-पुथल पैदा कर देती हैं और तब हम गलत निर्णय लेते हैं परन्तु कोई भी निर्णय लेने से पहले अगर हम अपने मन को शान्त रखे और धीरजपूर्वक बैठ के सोचे तो पानी के कीचड़ की तरह वो निचे बैठ जाती हैं और तब जो हम निर्णय लेते हैं वो हमेशा ही सही होता हैं…

इसी लिए बुरे समय में इंसान को कभी धीरज नहीं खोना चाहिए भगवान के इस उपदेश को सुनकर वह कुछ देर बैठकर सोचता हैं की उसने अपना घर परिवार छोड़ कर सही निर्णय नहीं लिया और उसी समय वह महात्मा बुद्ध से आज्ञा लेकर अपने घर चला जाता हैं…

 

In English

Once upon a time, a very poor man who used to live very hard lived in a small hut with his wife and 2 children, he used to leave every morning and come late at night. He was passing like this, due to not being able to take care of his family properly, he decided that he would leave his house.

One day when his family was sleeping in a deep sleep, he left the house and kept going without a destination. When he came far away from his house, he saw that Mahatma Buddha was sitting on a riverbank with his disciples. Thought that he would become a sanyasi and wander as a disciple of Lord Buddha.

Thinking this, he went to her tent and bowed down at her feet and said, “God take me as his disciple and keep me with you.”

Lord Buddha took pity on him and made him his disciple, after which he started going from there to another place, while walking he reached a forest where he stopped to rest under a big tree and it was summer season for Mahatma Buddha. When he felt thirsty, he told his new disciple that there is a lake nearby, you go and get water from there.

When he reached near the lake, he saw many wild animals roaming in it, but as soon as he went to fetch water, all of them ran away, he saw that the water was not clean at all, due to the fuss of the animals, the water had become completely dirty. Seeing this, he came back without filling water and said to Lord Buddha that the water of the lake was very dirty, it cannot be drunk.

Mahatma Buddha got into some thought and asked his disciple to go there again and bring water, this time when he reached near the lake, he saw that the water was completely clean and drinkable, he reached Lord Buddha with water and asked him Asked the lake whose water was dirty after some time there How did it become clean and drinkable on the go again?

Then Mahatma Buddha said when the animals were fussy in the water, then its mud had come up, but after remaining calm for some time, it sat back down. And the water became clean and potable again. In the same way, we also have the condition of our mind. Sitting and thinking, they sit down like mud of water, and then whatever decision we take is always right.

That is why a person should never lose patience in bad times, after listening to this teaching of God, he sits for some time and thinks that he did not take the right decision by leaving his family and at the same time he goes to his home after taking orders from Mahatma Buddha. ..