भगवान श्री कृष्ण की माया

आज हम आपको एक कृष्ण भक्त की कहानी सुनाने वाले हैं जो की धर्म से तो मुस्लिम थे पर उनकी हरी भक्ति ऐसी थी जो बड़े बड़े ऋषियों में भी नहीं थी यह बात वर्तमान में बांग्ला देश  का जो  यशोहर जिला हैं उसके एक छोटे से गांव बुडन की हैं इस गाँव में एक मुस्लिम परिवार रहता था इसी परिवार में हरिदास खां का जन्म हुआ था जन्मो का फल ही रहा होगा की हरिदास बचपन से ही हरि नाम का जाप करते रहते थे किशोर होते ही उन्होंने वैराग्य ले लिया और अपना घर त्याग जॅंगल में कुटियाँ बना कर रहने लगे हरिदास खां बड़े ही शांतिप्रिय और धैर्यवान साधु थे किसी की गलतियों को क्षमा करना उनका गुण तो निर्भयता उनकी आभूषण थी

वह दिन में तीन लाख हरी नाम का जाप वो भी तेज आवाज में किया करते थे

इसीलिए एक बार एक आदमी उनसे पूछता हैं की महाराज क्या भगवान कम सुनते हैं ?या कोई अन्य कारण हैं जो आप बड़े तेज आवाज में हरी जाप करते हैं |

उन्होंने कहा यह हरि नाम बड़ा ही पावन और आलौकिक हैं सिर्फ इसके सुनने मात्र से ही इस नरक से मुक्त कर देता हैं में इसी कारण तेज आवाज में जाप करता हूँ  ताकि मेरे आस पास रहने वाले जीव जन्तु और वातावरण के सभी कीटपतंगों का इस नरक से उद्धार हो सके |

उनकी इस बात से वह व्यक्ति संतुस्ट हो गया और उनकी चर्चा हर जगह होने लगी उनको देख कई लोगो ने भी वैराग्य ले लिया और हरी जाप में उनके साथ लग गए |  लेकिन कहते हैं न की जब कोई इंसान की चर्चा हर जगह होने लगे तो उनके भक्त तो बनते ही हैं साथ में उनसे जलने वाले लोगो की संख्या भी बढ़ने लगती हैं ठीक उसी तरह उसी गांव का एक व्यक्ति रामचंद्र खां जो की वहा का  जमींदार था उनसे बहुत जलने और चिढ़ने लगा वह बस हर हाल में उनकी कीर्ति को खत्म करना चाहता था इसीलिए उसने एक वैश्या को धन का लालच दिया और उनकी साधनाको भांग करने को कहा वह भी मान गई उसको तो बस धन का मोह था एक रात वह सज-धज के हरिदास की कुटियाँ पहुँच गई वह भगवान की तपस्या में लीन थे उनके तेजस्वी रूप को देख कर वह उनकी दिवानी हो गई और काम वासना के मोह में निर्लज होकर, अपने वस्त्र उतर  उनका ध्यान भांग करने की कोशिश करती रही परन्तु सफल नहीं हो पाई जब सुबह हुई तो उसने वस्त्र पहने और जाने लगी तभी हरिदास जी बोलो देवी मुझे माफ़ करना तपस्या में लीन होने के कारण में आपसे बात नहीं कर पाया किस कार्य से आप यहाँ आई थी वह मुस्कुरा के वहा से चली गई |

उसने कई दिनों तक उनका ध्यान भांग करने की कोशिश की परन्तु विफल रही  वहाँ रोज जाने से उसके कानो में हरि नाम का विचरण होने लगा और वह अंदर से पाप मुक्त हो गई फिर एक दिन उसने देखा हरिदास जी हरी भजन में लीन थे और उनके आँखों से आँसू निकल रहे हैं उसने सोचा जरूर इनको कोई आलोकिक आनंद मिलता हैं जिसके कारण मुझ जैसी परम सुन्दरी की तरफ यह देखते भी नहीं

वैश्या उनका ध्यान भांग करने आई थी परन्तु खुद ही वैराग्य की राह पर चल पड़ी  हरिदास जी ने उसे दीक्षा देकर उसे तपस्विनी बना दिए और हरि जाप में वह लीन रहने लगी उन्होंने उस जगह को उसे ही सौंप दिया और खुद हरि नाम का प्रचार करने निकल पड़े |

हरिदास वहाँ से निकल कर शांतिपुर पहुंचे वहाँ मुस्लिम शाशक था उसके फतवे से हिन्दुओ का आचरण बड़े ही मुश्किल से होता था पर हरिदास जी मुस्लिम होते हुए भी हिन्दुओ की तरह रहते और हरि नाम का प्रचार करते यह बात उनके कुछ अधिकारियों को पसंद नहीं आई और राजा को बड़ा-चढ़ा कर इस बारे में बताया राजा ने तुरंत बंदी बना लेने का आदेश दिया और उन्हें जेल में डाल दिया गया यह खबर आग की तरह हर जगह फेल गई और राजा की निंदा होने लगी इधर हरिदास जी जेल में ही हरि जाप में लग गए वहा के सभी बंदी भी उनके भक्त बन गए इतना सब देख के अधिकारियों ने उन पर मुक़दमा चलाया और उन्हें जगह जगह ले जाकर जब तक उनकी साँस  बंद न हो जाए तब तक कोड़े मारने का आदेश दिया गया यही किया भी गया अतः सिपाहियों ने उन्हें मारा जान कर गंगा में फ़ेंक दिया परन्तु कहते हैं न “जिसके जिंदगी की डोर खुद भगवान ने पकड़ रखी हो उसको कोई क्या मारेगा’, वे जग कर वापस आ गए और जब यह खबर अधिकारियों को लगी तो वह भयभीत होकर उनके पास आये और उनसे चरण पकड़ लिए हरिदास जी ने उनको छमा कर दिआ और हरि नाम का जाप करते-करते वहाँ से चले गए |

 

In English

Today we are going to tell you the story of a Krishna devotee who was a Muslim by religion, but his devotion was such that it was not even among the great sages, this thing is about Budan, a small village in the Yashohar district of Bangladesh at present. There used to be a Muslim family in this village, Haridas Khan was born in this family, it must have been the result of the births that Haridas used to chant the name of Hari since childhood, he took renunciation as soon as he was a teenager and left his home in the huts in the forest. Haridas Khan was a very peaceful and patient monk, forgiving one’s mistakes was his quality and fearlessness was his ornament.

He used to chant three lakh green names in a day, that too in a loud voice.

That’s why once a man asks him, ‘Maharaj, does God listen less? Or is there any other reason why you chant green in a loud voice

He said that the name of Hari is very pure and supernatural, just by hearing it, I free myself from this hell, for this reason, I chant in a loud voice so that the creatures living around me and all the insects of the environment can be removed from this hell. may be saved

The person was satisfied with this and his discussion started happening everywhere, seeing him, many people also took renunciation and joined him in green chanting. But it is said that when a person is being discussed everywhere, then his devotees are formed, along with the number of people who burn him also starts increasing, in the same way, a person from the same village, Ramchandra Khan, who was the landowner of that village. He started getting very jealous and irritated, he just wanted to destroy his fame in any case, that’s why he lured a prostitute for money and asked him to do cannabis, she also agreed, he was just in love with money, one night he used to decorate. Haridas reached the huts, he was absorbed in the penance of God, seeing his stunning form, she became addicted to him and, being shameless in the temptation of lust, tried to distract his attention by taking off his clothes but could not succeed. When it was morning, she put on clothes and started leaving, only then Haridas ji, Goddess forgive me, because of being involved in austerity, I could not talk to you, for what work did you come here, she smiled and left from there.

He tried to meditate on them for several days but failed. By going there every day, the name of Hari started circulating in her ears and she became free from sin, then one day she saw Haridas ji was absorbed in Hari Bhajan and his eyes Tears are pouring out of him, he thought that he must surely get some celestial pleasure, due to which he does not even look towards a supreme beauty like me.

The prostitute had come to meditate on him, but Haridas Ji himself started on the path of dispassion, initiated her, and made her an ascetic and she started getting absorbed in Hari chanting, she handed over that place to her and himself went out to propagate the name, Hari. lay down

Haridas left from there and reached Shantipur, there was a Muslim ruler, because of his fatwa, the conduct of Hindus was very difficult, but Haridas Ji, despite being a Muslim, lived like a Hindu and preaching the name of Hari, some of his officers did not like it and told the king about this exaggeratedly, the king ordered to be taken captive immediately and he was put in jail, this news spread like fire everywhere and the king was condemned, here Haridas Ji in Hari Jaap in the jail itself. It took that all the captives there also became his devotees, seeing all this, the officers prosecuted them and taking them from place to place, they were ordered to be whipped till their breathing stopped, this was also done, so the soldiers were thrown into the Ganges knowing that they were killed, but it is said that no one will kill the one whose life has been held by God himself, they woke up and came back and when the officials got this news, they came to them in fear and Taking hold of his feet, Haridas Ji apologized to him and left from there while chanting the name of Hari.