Bhagwan Shiv Ki Kahaniyan

Bhagwan shiv or vidhapati ki kahani

आज आपको 1360 ई की एक सच्ची घटना पर आधारित एक कहानी सुनाते हैं जो की मैथली भाषा के मशहूर कवि विद्यापति जी की हैं उन्होंने भगवान शिव के ऊपर कई रचनाएँ लिखी और इसके साथ-साथ वह भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त भी थे

जिससे प्रसन होकर भगवान शिव ने उनके घर जाकर नौकरी करने की सोची एक दिन वह एक मामूली गरीब इन्सान का भेस बनाकर उनके घर गए और उनके साथ रहकर कार्य करने की इच्छा जताई परन्तु विद्यापति भी बहुत गरीब थे वह उन्हें कैसे रख सकते थे वह खुद ही बड़े मुश्किल से अपने परिवार का लालन-पालन कर रहे थे जब शिव जी ने कहा की उन्हें बस 2 वक़्त का खाना ही चाहिए इसके अतिरिक्त उन्हें कुछ  नहीं चाहिए तब पत्नी के कहने पर विद्यापति ने उन्हें रख लिया भगवान शिव ने अपना नाम पूछे जाने पर  उगना बताया था |

अब विद्यापति जहाँ जाता वहाँ उगना (अर्थात भगवान शिव )भी जाता एक दिन वह एक आवश्यक कार्य के लिए राजा के दरबार में जा रहे थे तो उगना भी साथ हो लिया उन दिनों गर्मियो का मौसम था जिससे रस्ते में जाते वक़्त विद्यापति का गाला सूखने लगा और आस-पास ना तो कोई सरोवर था ना ही कोई पानी का स्त्रोत जिससे वह अपनी प्यास बुझ सके तब वह उगना से  कहता हैं की तुम जाकर कही से मेरे लिए पीने का पानी लेकर आओ तब वह कुछ दूर जाकर जब उसकी आँखों से ओझल हो जाता हैं तब उगना यानि भगवान शिव अपने असली रूप में आते हैं और अपनी जटाऔ से  गंगा जल भरकर विद्यापति को लाके देते हैं जब वह पानी पीता हैं तब उसे उसका स्वाद गंगा जल जैसा मीठा पानी लगता हैं और वह सोचता हैं की इस गर्मी में जहा कोई पानी का स्त्रोत नहीं हैं वहाँ से इतना मीठा और शीतल पानी कैसे मिला |  हो ना हो यह उगना नहीं हैं यह स्वयं भगवान शिव हैं तब वह उगना को भगवान शिव कहकर पुकारता हैं और उनकी चरणों में गिर जाता हैं उस वक़्त भगवान शिव को अपने असली रूप में आना पड़ता हैं और भगवान शिव उसको कहते हैं की में तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ परन्तु तुम किसी को भी मेरे बारे में नहीं बताओगे इस शर्त को विद्यापति मन जाता हैं फिर दोनों एक साथ रहने लगते हैं। .

एक दिन उगना की किसी गलती की वजह से विद्यापति की पत्नी उनको चूले की जलती हुई डंडी से मारने लगती हैं उसी वक़्त विद्यापति भी आ जाता हैं और अपनी पत्नी से कहता हैं अरे मूर्ख ये क्या कर रही हो यह स्वयं भगवान शिव हैं उसके इतना कहते ही वह  अर्न्तध्यान हो गए  फिर क्या था विद्यापति उनको हर जगह पागलो की तरह ठूंडने लगा परन्तु वह नहीं मिले यह देख भगवान शिव ने उसे दर्शन देने आये और  उसको बोले मेरा भेद अब सबके सामने खुल चूका हैं इसी लिए में अब उगना बनकर तुम्हारे साथ नहीं रह सकता अब में यहाँ शिवलिंग के रूप में विराजमान रहुँगा जोकि उगना का प्रतीक होगा इतना कहके वह चले गए और उसी जगह एक शिवलिंग प्रकट हो गया तबसे आज तक वह वही स्थित हैं जो की वर्तमान में उगना महादेव का प्रशिद्ध  मंदिर बिहार के मधुबनी जिला में भवानीपुर गांव में स्थित है।

 

In English

Today, let us tell you a story based on a true incident of 1360 AD, which is the famous poet of the Maithili language, Vidyapati Ji, he wrote many compositions on Lord Shiva, and along with this, he was also a great devotee of Lord Shiva.

Due to which Lord Shiva thought of going to his house and doing a job, one day he went to his house in the disguise of a modest poor person and expressed his desire to work with him, but Vidyapati was also very poor, how could he keep him himself. He was taking care of his family with great difficulty, when Shiva said that he only needs food for 2 times, apart from this, he does not want anything, then Vidyapati kept him at the behest of his wife, Lord Shiva asked Vidyapati on his own. Was told to grow

Now growing up wherever Vidyapati went (ie Lord Shiva) also went one day he was going to the king’s court for important work, so growing up also accompanied him. And there was neither any lake nor any source of water so that he could quench his thirst, then he tells Ugna that you go and bring me drinking water from somewhere, then he will go some distance when it is out of his eyes. When he goes to grow, i.e. Lord Shiva comes in his real form and fills Ganga water with his hair and brings it to Vidyapati, when he drinks the water, then he tastes it as sweet water like Ganges water and he thinks that in this heat where There is no source of water, how did you get so much sweet and soft water from there. Yes, it is not to grow, it is Lord Shiva himself, then he then calls Ugna as Lord Shiva and falls at his feet, at that time Lord Shiva has to come in his original form and Lord Shiva tells him that I want to live with you, but you will not tell anyone about me, this condition is accepted by Vidyapati, then both start living together.

One day due to some mistake of growing up, Vidyapati’s wife starts beating him with the burning stick of the stove, at the same time Vidyapati also comes and tells his wife, hey fool, what are you doing, it is Lord Shiva himself. He became deeply meditative, then what was Vidyapati trying to find him everywhere like a madman, but seeing that he could not be found, Lord Shiva came to see him and told him that my secret is now open in front of everyone, that is why I am growing up and not with you. Now I will be sitting here in the form of Shivling which will be a symbol of Ugna It is located in Bhawanipur village.