एक नगर में भगवान शिव का भव्य मंदिर जहाँ हर वर्ष दूर दूर से भक्तजन शिव जी के दर्शन के लिए आते रहते थे सावन का महीना था दूर दूर से कावड़िये जलाभिषेक करने के लिए आये थे मंदिर का परिषर भक्तो की भीड़ से भरा हुआ था तभी अचानक आकाश में बिजली कड़की और एक सोने का थाल उतरा साथ में एक आकाशवाणी हुई ‘जो कोई भगवान शंकर का सच्चा भक्त और प्रेमी होगा उसी को यह थाल मिलेगा” …

 

मंदिर में उपस्थित सभी लोगो ने यह आकाशवाणी सुनी धीरे धीरे सभी इकठे हुए और जो लोग मंदिर की व्यवस्था देखते थे उन्हें तो पूरा विश्वास था की यह थाल तो हमें ही मिलेगा इसीलिए वह सबसे आगे जाकर खड़े हो गए सबसे पहले पंडित जी आये और बोले देखिये में प्रतिदिन महादेव का अभिषेक करता हूँ और उनके सबसे निकट रहता हूँ  अतः ये थाल मुझे ही मिलना चाहिए और यह कहकर जैसे ही वह थाल उठाते हैं वह पीतल का बन जाता हैं यह देखकर पंडित जी बड़े लज्जित हुए उन्होंने थाल यथास्थान पर रखा और वहाँ से निकल गए | इसी तरह वहाँ उपस्थित सभी पंडितो ने खुद को आजमाया लेकिन शायद उनमे से कोई भी सच्चा भक्त नहीं था अतः उन्हें भी थाल को यथास्थान पर रख कर जाना पड़ा |

उसके बाद उस नगर के राजा का आगमन हुआ जब राजा आगे आये और बोले मेने मंदिर में बड़ी दान दछिना दी हैं इसीलिए यह थाल मुझे मिलनी चाहिए जैसे ही उन्होंने थाल उठाया वह ताँबे का बन गया अतः वह भी थाल रख कर चले गए इसी तरह एक से दानी, महात्मा, और भक्तो ने उसे लेने का प्रयास किया परन्तु वहाँ कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं था जो उस थाल के योग्य हो और कह सके की में भगवान शिव के सच्चे भक्त हूँ |

भगवान का सच्चा भक्त कौन ?

मंदिर परिसर में यह चर्चा होने लगी की आखिर भगवान् शिव का सच्चा भक्त कोन  हो सकता हैं तभी वहाँ एक किसान का आगमन होता हैं वह कई महीनो बाद आज चातुर्मास के सोमवार के शुभ अवसर पर शिव जी के दर्शन करने आया था गरीबी और गृहस्थ जिन्दगी के बोझ तले दबा दिन रात मेहनत मजदूरी करके अपना और अपने परिवार का पालन-पोषण करता था रास्ते में आते वक़्त उसे कई दिन का भूखा एक बिखारी मिला भूख  के मारे वह तड़प रहा था किसान को यह देख उसपर दया आ गई और जो भोजन वह खुद के लिए लाया था उसने भिखारी को दे दिया थाल के बारे में इसने भी सुना था परन्तु वह चुप चाप मंदिर में गया और भगवान शिव के दर्शन करके जाने लगा यह देख वहाँ उपस्थित लोगो ने उससे कहा अरे भाई तुम भी एक बार थाल लेने की कोशिश क्यों नहीं करते क्या पता वह तुम्हारे लिए ही आया हो यह सुन किसान को लगा की सभी लोग उसे तना मार रहे हैं तभी किसान बोला भाई में तो कभी कोई पूजा पाठ ही नहीं करता कभी कभी मौका मिलने पर बस भोलेनाथ के दर्शन करने चला आता हूँ में कैसे सच्चा भक्त हो सकता हूँ

फिर वह बोले भाई हम तो देख चुके हैं हमारी भक्ति तो बस किसी काम की नहीं क्या पता तुम्हारी भक्ति ही काम की हो एक बार आजमा के तो देखो।।

लोगो के इतना कहने पर वह भी थाल उठाने चल दिया जैसे ही उसने थाल उठाया लोगो के आश्चर्य का ठिकाना न रहा इस बार थाल सोने की रौशनी से चमचमाने लगा लोगो में ख़ुशी की लहर दौड़ गई की आखिर भगवान शिव का सच्चा भक्त मिल ही गया लोग उस किसान के नारे लगाने लगे उन्होंने उससे पूछा की भाई तुम कैसी भक्ति करते हो हमें भी बताओ तब किसान बोला में किसी तरह की भक्ति नहीं करता में तो दिन भर खेतो में मेहनत मजदूरी करके दिन बीतता हूँ कुछ वक़्त मिलने पर लोगो की मदत करता हूँ |

लोगो ने पूछा तुम मदद क्यों करते हो ? तो उसने कहा सुकून के लिए लोगो के मुस्कुराते चेहरे को देख कर  मुझे सुकून और खुशी मिलती हैं  शायद यही वजह हैं की महादेव ने मुझपर दया की तो मित्रो इसीलिए कहते हैं अच्छे कर्म करते रहो भगवान एक न एक दिन उन कर्मो का फल जरूर देते हैं…..

In English

A grand temple of Lord Shiva in a city where devotees from far and wide used to come every year to see Shiva Ji. It was the month of Sawan. Kavadis had come from far and wide to perform Jalabhishek. The temple complex was full of devotees when suddenly. Lightning struck the sky and a gold plate landed, accompanied by a voice from the sky, “Whoever is a true devotee and lover of Lord Shankar will get this plate” …

 

All the people present in the temple listened to this Akashvani, slowly everyone gathered and those who used to see the arrangement of the temple, they had full faith that we will get this plate, that’s why they went to the front and stood first, Pandit Ji came and said, see I anoint Mahadev every day and I stay closest to him, so I should get this plate and as soon as he picks up this plate, it turns into brass, Pandit Ji was very ashamed to see that he kept the plate in its place and from there Went out Similarly, all the priests present there tried themselves but perhaps none of them were true devotees, so they also had to keep the plate in its place.

After that the king of that city came when the king came forward and said that I have donated a lot in the temple, that is why I should get this plate, as soon as he picked up the plate, it became of copper, so he also kept the plate and left in the same way. Dani, Mahatma, and devotees tried to take it from him but there was no such person who was worthy of that plate and could say that I am a true devotee of Lord Shiva.

Who is the true devotee of God?

There was a discussion in the temple premises that after all, who can be a true devotee of Lord Shiva, only then a farmer comes there, he came after many months today, on the auspicious occasion of Chaturmas, to see Shiva ji, due to poverty and household life. Working hard day and night under the burden, he used to take care of himself and his family, while coming on the way, he found a poor person hungry for many days, he was suffering due to hunger, the farmer felt pity for him and the food he himself He had also heard about the plate given to the beggar, but he silently went to the temple and after seeing Lord Shiva, the people present there said to him, hey brother, you also tried to take the plate once. Why don’t you know that he has come for you only after hearing this, the farmer felt that all the people were taunting him, only then the farmer said, brother, he never does any worship, sometimes when I get a chance, I just go to see Bholenath. how can I be a true devotee?

Then he said brother, we have already seen our devotion, just don’t know if your devotion is of any use, try it once and see.

At the behest of the people, he also went to lift the plate, as soon as he picked up the plate, there was no place for the people’s surprise, this time the plate started shining with gold light, there was a wave of happiness among the people that finally the true devotee of Lord Shiva was found. He started shouting slogans of that farmer, he asked him what kind of devotion do you do brother, tell us also, then the farmer said that I do not do any kind of devotion, so I spend the day working hard in the fields, I help people when I get some time. |

People asked why do you help? So he said, looking at the smiling faces of people for peace, I get peace and happiness, maybe this is the reason why Mahadev took pity on me, so friends say that keep doing good deeds, God definitely gives the fruits of those deeds one day or the other. …..